sawan ki katha
श्रावण मास महादेव
का सबसे प्रिय महीना है क्योंकि श्रावण मास में सबसे अधिक वर्षा होने के आसार रहते हैं, यह माह देवों के देव महादेव के गर्म शरीर को ठंडक प्रदान करता है। इस दौरान व्रत, दान व पूजा-पाठ करना अति उत्तम माना गया है। इस महीने में तपस्या और पूजा पाठ से शिव जी जल्द प्रसन्न होते हैं। भगवान शंकर ने स्वयं सनतकुमारों को सावन महीने की महिमा बताते हुए कहा है कि उनके तीनों नेत्रों में सूर्य दाहिने, बाएं चन्द्र और अग्नि मध्य नेत्र है।
इस मंत्र से सोमवार का संकल्प किया जाता है। : मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमव्रतं करिष्ये'
यह है ध्यान मंत्र- 'ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
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